रविवार 19 अप्रैल 2026 - 23:28
बगदाद के इमाम जुमा: ईरान के दृढ़ रुख और हिज़बुल्लाह के प्रतिरोध ने अमेरिका और इज़राइल को युद्धविराम के लिए मजबूर कर दिया

आयतुल्लाह सय्यद यासीन मूसवी, बगदाद के इमाम जुमा और नजफ़ अशरफ़ के प्रमुख विद्वानों में से एक, ने साफ़ तौर पर कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान का रणनीतिक दृढ़ता और हिज़बुल्लाह का मैदानी प्रतिरोध, अमेरिका और इज़राइली शासन को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बगदाद में जुमा के खुतबे में आयतुल्लाह मूसवी ने कहा कि इराक़ की राजनीतिक उलझनें अब भी राष्ट्रपति चुनाव और सरकार गठन के मुद्दे पर हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपने हितों को राष्ट्रीय हितों पर तरजीह दे रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि प्रधानमंत्री चुनने में भी यही गलती दोहराई गई तो यह एक नई राजनीतिक भूल होगी। प्रधानमंत्री का पद कोई दलीय इनाम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय हक़ है।

इराक़ की आर्थिक समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गैस की कमी और महंगाई जैसे मुद्दे असली भी हो सकते हैं और कुछ प्रभावशाली लोगों के भ्रष्टाचार के कारण भी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो गरीब तबकों में असंतोष फूट सकता है और यह सामाजिक विस्फोट का रूप ले सकता है।

क्षेत्रीय मामलों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इराक़ 'ग्रे ज़ोन' में नहीं रह सकता और न ही भाग्य के फैसलों पर तटस्थ रुख अपना सकता है। उन्होंने कहा कि लेबनान में कुछ लोगों ने ईरान-अमेरिका वार्ता के साथ युद्धविराम को जोड़ने का विरोध किया, जिससे हिंसा बढ़ी और सैकड़ों लोग मारे गए।

आयतुल्लाह मूसवी ने जोर देकर कहा कि हालिया युद्धविराम सिर्फ राजनयिक प्रक्रियाओं का नतीजा नहीं, बल्कि ईरान के दबाव और हिज़बुल्लाह के मैदानी प्रतिरोध के कारण आया। उन्होंने कहा कि जो हुआ वह दर्शाता है कि चुनौतियों के सामने प्रतिरोध के विकल्प से चिपके रहना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने खाड़ी देशों से बाहरी ताकतों पर निर्भरता छोड़कर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

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